सही शिक्षा क्या है

सही शिक्षा क्या है परमात्मा ने हमें पहले समय में शिक्षा इसलिए नहीं दी क्योंकि यह शिक्षा हमारी सबसे बड़ी दुश्मन है यदि हम शिक्षा प्राप्त करके परमात्मा की खोज नहीं करते तो यह शिक्षा व्यर्थ है इस शिक्षा ने हमें अंहकारी बना दिया और मर्यादाहीन बना दिया माया का आधीन बना दिया माया को जोड़ना ही उद्देश्य मान लिया कोई भी बच्चा शिक्षा ग्रहण करने के लिए घर से चलता है तो उसका एक ही उद्देश्य होता है कि बड़ा अफसर बनू बेईमानी रिश्वतखोरी से ज्यादा धन कमाता है और धन कमाने के बाद क्या पता कब मृत्यु हो जाए तो वह धन यही रह जाता है सिर्फ पाप कर्म ही साथ जाते हैं।
Lord kabir ji


परमात्मा ने हमें शिक्षा इसलिए दी है कि हम सच्चे परमात्मा को पहचान सके इस रोजी-रोटी कमाने के लिए या धन कमाने के लिए शिक्षा की कोई जरूरत नहीं थी शिक्षा से भौतिक सुख कम मिलते हैं और चिंताएं अनेक हो गई इसके दुःख ज्यादा हो गए। बस यह शिक्षा एक ही तरह से अच्छी है क्योंकि हम इससे भगवान को पहचान सके। शिक्षा का मूल उद्देश्य धन कमाना या बड़े बड़े अफसर बनना डॉक्टर इंजीनियर बनना नहीं है। क्योंकि इस 21 ब्रह्मांड में कोई भी सुख नहीं है चाहे कितना ही धन कमा लो। ‌शिक्षा का मूल उद्देश्य सच्चे भगवान को पहचान कर यहां से अपना पीछा छुड़वाकर वहा चले जाएं जहां पर जन्म मरण नहीं होता यहां पर वृद्ध अवस्था नहीं होती।

यहां पर चाहे हमें कितने ही सुख हो कितनी ही संतान अच्छी भी है यहां सांसारिक सभी भौतिक सुख भी प्राप्त है लेकिन क्या पता हमारी कल मृत्यु हो जाए सत्यभक्ति किए बिना गधा बन जाएंगे तो फिर क्या काम आएगा वह सुख जो हम छोड़ कर चले गए। कुछ काम नहीं आएगा।

यह भौतिक शिक्षा हमारी सबसे बड़ी शत्रु है हम भले ही इसको बड़े गर्व के साथ कहते हैं कि शिक्षा नहीं है तो पशु के समान जीव है। ऐसा कहने से पहले हमें सोचना चाहिए कि हमारे बड़े पूर्वज क्या पशु थे। जिन्होंने शिक्षा ग्रहण नहीं की थी कि कितने नेक विचार थी और कितनी सद्भावनाए थी आज के मानव और उनमें जो अशिक्षित थे दोनों को मिलाकर देखें तो कितना फर्क है। आज ही शिक्षा से बिगड़े हुए लोगों को सुधारना कितना मुश्किल हो गया है लोगों में अंहकार का अंत नहीं पाप कर्म करने से बिल्कुल भी नहीं डरते। मानव मानव का दुश्मन हो गया है शिक्षा के कारण आपस में राग द्वेष लड़ाई झगड़ा आदि की भावना हो गई है भाई-भाई को
 दुश्मन बना दिया।

परमात्मा ने हमें शिक्षा इसलिए दी क्योंकि हम परमात्मा को पहचान सके इसलिए यह विष हमें‌ परमात्मा ने तीन युगों में नहीं दिया सतयुग, त्रेता ,द्वापर तक केवल एक ब्राह्मण वर्ग ही शिक्षित होता था अन्य अपने परंपरागत काम ही करते थे और सुख से जीवन व्यतीत करते थे ना कोई राग द्वेष था ना आपस में कपट था। जब से यह शिक्षा शुरू हुई तब से हमारे जीवन में बहुत परिवर्तन हो गया लेकिन आज यह शिक्षा अनिवार्य है प्रत्येक को शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए ताकि वह अपने वेदों ,पुराणों ,सद ग्रंथों को पढ़कर भगवान को पहचान सके।

शिक्षा का सबसे बड़ा लाभ हमें अब होगा भले ही मानव बिगड़ गया है शिक्षा का मूल उद्देश्य वह हमारे जीवन का मूल उद्देश्य अध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करना है जो अब यह शिक्षा हमें पूर्ण परमात्मा को प्राप्त करने में पहचानने में सहयोग करेगी।



अब पूरा समाज शिक्षित हो गया है तो अपने आध्यात्मिक ज्ञान को समझो जो सच्ची शिक्षा है परमात्मा ने हमें शिक्षा दी ताकि हम अपने सभी वेदों ,पुराणों, ग्रंथों, गीता आदि का ज्ञान समझें किसी की दंतकथा पर विश्वास न करें वेदों शास्त्रों को आधार मानकर भक्ति करें तभी हमें इस शिक्षा का लाभ मिलेगा।
इस भौतिक शिक्षा से हमें कोई लाभ नहीं है यह सिर्फ नुकसान है करती है इसका एक ही लाभ है की यह हमें अध्यात्मिक ज्ञान से परिचित करवा कर परमात्मा को पहचानने में मदद करती है आध्यात्मिक शिक्षा ही सच्ची शिक्षा है जो आज पूरे समाज को समझनी चाहिए और ग्रहण करनी चाहिए। आज सच्ची शिक्षा वह सत्य आध्यात्मिक ज्ञान शास्त्रों के अनुसार साधना भक्ति संत रामपाल जी महाराज प्रमाणित करके बताते हैं इसलिए आप सभी समाज उनके ज्ञान को समझें और उनकी शरण ग्रहण करके अपने मानव जीवन को सफल करें।

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