मानवता का उत्थान
समय सत्ययुग से कलयुग की तरफ बढ़ रहा है वैसे ही मानव के विचारों व संस्कारों में भी कमी आती नजर आ रही हैं। सतयुग में मानव प्राणी भगवान की भक्ति क्या करते थे, नेक विचार रखते, बुराइयों से दूर रहते,एक दूसरे इंसान की सहायता करने में हमेशा तत्पर रहते , चोरी करना विष के समान माना जाता था। लेकिन अब मानव की बुद्धि ही खराब हो गई और उनके विचारों में भी कमी होती जा रहा है। इंसान एक दूसरे की सहायता करना तो दूर उल्टा अपने से निम्न स्तर के इंसानों का शोषण करने में लगा रहता है। मानवता के संस्कारों में कमी नजर आ रही है। खान-पान से लेकर पहनावे तक देख लो इंसान का स्तर नीचे गिरता जा रहा है। बहन बेटियों को पूरे कपड़े पहनने की वजह बिल्कुल छोटे कपड़े पहनकर अपने आपको गर्व भरा महसूस करने लगते हैं। मानव को परमात्मा का डर रहा नहीं और जीवो के प्रति दया रत्ती भर भी नहीं रही । हर प्रकार की बुराई करने में सबसे पहले आगे रहता है। अमीर लोग गरीबों का सताने में रहता है। आज वर्तमान समय में सरकार के इतने कठोर नियम व संविधान होने के बावजूद भी समाज में मानवता का नामोनिशान मिटता जा रहा...