राजनीति और हमारा समाज


                         राजनीति और हमारा समाज






. समाज सेवा राष्ट्र सेवा है:-

जैसे सेना सीमा पर राष्ट्र सुरक्षा की सेवा करती है वैसे
ही रा जनितिक समाज सेवा समीति राष्ट्र के अन्दर
लगी दीमक से सुरक्षा करेगी। आज हमारे देश की राजनीतिक व्यवस्था  बिगड़ गई है और हमारे देश को  अंदर से खोखला व कमजोर कर
देती हैं। जिस कारण से देश की राजनीतिक दीवार गिर रही है। 
देश के सदस्य भी नीचे दब कर मर जाते हैं। इसी प्रकार निम्न
दीमक राजनीतिक
 को खोखला तथा कमजोर बना रही है।

 वेशभूषा:-
पश्चिमी देशों वाला फैशन न हो। शरीर ढ़कने के लिए
वस्त्रा मानव समाज की सभ्यता का प्रतीक है। मानव
के अतिरिक्त सर्व प्राणी निवस्त्रा रहते हैं। कुत्ते-बंदर
को छोड़कर अन्य प्राणियों को अपने गुप्तांग ढ़कने के
साधन दुम तथा बाल परमात्मा ने दिए हैं। मानव
को भी बाल दिए हैं। मानव को परमात्मा ने
बुद्धि अधिक प्रदान की है जिस कारण मानव ने
वस्त्रों का प्रयोग किया। वर्तमान में
जो पश्चिमी देशों वाली वेशभूषा का प्रचलन बढ़ा है
वह सभ्य समाज का नहीं है। शरीर के अधिक अंग नंगे
रखना एक परम्परा-सी बन गई है। उन
व्यक्तियों का जो परमात्मा की सत्य
साधना नहीं करते, यह शौक अगले जन्म में कुत्ते-
कुतिया तथा बंदर-बंदरिया बन कर पूरा हो जाएगा।
वर्तमान में कुछ लड़कियों ने पैंट, पाजामा अर्थात्
लड़कों वाली वेशभूषा पहनना आरंभ कर दिया है। यह
उचित नहीं है। हमारे पूर्वजों ने स्त्राी-पुरूष
की पोशाक भिन्न-भिन्न बनाई थी जो उचित है।
यदि लड़कों ने लड़कियों वाली सलवार-
कुर्ता चुन्नी प्रयोग करना शुरू कर
दिया तो कितनी अराजकता फैल जाएगी। लड़का-
लड़की की पहचान न होने से उपद्रव हो जाएगा।
इसलिए वस्त्रा भिन्न हों तथा कार्य करने में बाधक न
हों, कार्य में सुविधाजनक हों। जैसे लड़के-
लड़कियां जीन्स की पैंट पहनते हैं मानो पलस्तर कर
रखा हो। यह सब गलत है। यह सिनेमा की देन है।
सिनेमा निर्माताओं को चाहिए कि वे केवल पैसा न
देखें, मानव हित को मध्यनजर रखकर सिनेमा बनाऐं।
सिनेमा वालों को पत्राचार
द्वारा प्रार्थना की जाए, कानून
भी ऐसा बनाया जाए जिसमें सिनेमा निर्माता कोई
समाज विरोधी पोषाक का प्रयोग न करें।
. जीव हिंसा पाप है:- माँस न खाने तथा जीव
हिंसा न करने के लिए मानव समाज को प्रेरित
करना तथा जीव हिंसा के पाप से परिचित करना है।

मांस भक्षण कितना पाप है? पढ़ें इसी पुस्तक के पृष्ठ 25 व
37 पर। राष्ट्रीय समाज सेवा समिति सर्व मानव
समाज से विनम्र प्रार्थना करती है कि आप स्वयं
तथा अपने बच्चों को आध्यात्मिक ज्ञान सुनें
तथा सुनाऐं। इससे बच्चे तथा जवान गलतियों से बच कर
स्वयं भी चैन-अमन से जीऐंगे तथा सभ्य समाज
को भी अमन से जीने देंगे।

हमारे कुछ सदस्य झूठे मुकदमों में (जिनका उल्लेख पुस्तक
‘‘न्यायालय की गिरती गरिमा‘‘ में है) रोहतक जेल में
थे। वहां पर कई व्यक्ति मिले जो बलात्कार के अपराध में
कैद काट रहे थे, वे पछता रहे थे। बता रहे थे कि दुर्भाग्य ने
ऐसा घिनौना कर्म करा दिया। न समाज में इज्जत
रही, धन भी बहुत खर्च हो गया। घर का कार्य भी ठप्प
पड़ा है। अब हम बहुत पाश्चाताप कर रहे हैं तथा अब सर्व
स्त्राी बहन के तुल्य लग रही हैं। भक्तों ने
बताया कि यदि आप जी ने संत रामपाल दास
जी महाराज का सत्संग सुना होता तो यह विचार
आप पाप करने से पहले करते और महापाप तथा जेल के दुःख
से बच जाते। संत रामपाल दास जी महाराज सत्संग में
बताते हैं:-
कबीर, परनारी को देखिये, बहन बेटी के भाव।
कह कबीर काम नाश का, यही सहज उपाय।।
.वर्तमान के संत शास्त्रा विरूद्ध ज्ञान तथा नाम-
मन्त्रा प्रदान कर रहे हैंः-
सर्व संतों से प्रार्थना करेंगे कि आप जी अपने
द्वारा बताई गई साधना मंत्रों का प्रमाण बताऐं
कि वे शास्त्रा प्रमाणित हैं। यदि नहीं हैं तो आप
जी श्रद्धालुओं का जीवन नष्ट न करें। उनसे कह दें
कि हमारी भक्ति विधि मोक्षदायक नहीं है,
वास्तविक भक्ति विधि संत रामपाल दास
जी महाराज सतलोक आश्रम बरवाला जिला-हिसार
(हरियाणा) के पास है। अपने सिर
से शिष्यों का भार उतारें। ***------*****--और अधिक जानकारी के लिए पुस्तक "ज्ञान गंगा" निःशुल्क (फ्री) मगवाऐ ।पुस्तक निःशुल्क ज्ञान गंगा
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